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रायपुर में भव्य अघोर महोत्सव एवं श्री यज्ञ अनुष्ठान का आगाज

रायपुर/धमतरी। अघोर पीठाधीश बाबा रुद्रानंद प्रचंड वेग नाथ के पावन सान्निध्य में असम स्थित पवित्र कामाख्या शक्तिपीठ में धरती माता के रजस्वला काल के शुभ अवसर पर प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी रायपुर में भव्य अघोर महोत्सव एवं श्री यज्ञ अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है।

प्रोफेसर कॉलोनी, पुरानी बस्ती स्थित मनसा तालाब के समीप अघोर पीठ श्रीधाम सुमेरू मठ, औघड़नाथ दरबार में यह आयोजन 21 जून प्रातः 4:00 बजे से प्रारंभ होकर 25 जून रात्रि 2:00 बजे तक निरंतर चलेगा। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह महोत्सव इस बार भी धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।सुमेरु मठ के भीतर ही बाबा औघड़नाथ की गद्दी स्थापित है। इस मठ की मुख्य विशेषता इसका श्रीयंत्र-आधारित गुंबद निर्माण है, जिसमें 43 त्रिकोणों में पारद शिवलिंग स्थापित हैं। यह अनूठी संरचना दूर से ही दर्शनीय है और इसे सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। मठ में भगवान शिव की पूजा रसेश्वर महादेव के रूप में की जाती है तथा यहाँ लंबे समय से अखंड धुनी प्रज्वलित है, जिसमें नियमित रूप से अग्निहोत्र संपन्न होता है। श्रीधाम सुमेरु मठ के गुंबद और गर्भगृह, दोनों ही स्थानों पर पारद (पारा) से बने शिवलिंग की स्थापना की गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चांदी या पत्थर आदि धातुओं की तुलना में पारद शिवलिंग को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। विशेष अवसरों पर होने वाली साधना और अनुष्ठानों में शामिल होने के लिए यहाँ

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शिवभक्तों का तांता लगा रहता है।यहाँ की एक विशिष्ट परंपरा के अनुसार समस्त पूजा-अर्चना, आरती, भोग और अग्निहोत्र का संचालन एक महिला द्वारा किया जाता है, जो बाबा औघड़नाथ की शिष्या हैं और जिन्हें श्रद्धालु माँ कहकर संबोधित करते हैं। इसके साथ ही मठ में प्रतिदिन भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें न केवल मनुष्यों बल्कि पशुओं के लिए भी भोजन की व्यवस्था रहती है।जरूरतमंदों को भोजन वितरण की परंपरा भी यहाँ लगातार निभाई जाती है। अघोर पंथ से जुड़े इस मठ में ध्यान, योग, आयुर्वेद और सनातन संस्कृति की शिक्षा भी दी जाती है, जिससे यह स्थान आध्यात्मिक साधना और सामाजिक सेवा का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।

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